muktak by Piyush Sharma Ashiqe

बहुत रोया बहुत तड़पा, तुम्हारी याद मे हमदम ।
इलाही क्या बताए अब, मिलन के सिलसिले है कम ।।
फ़कत जिनकी निगाहों को, मेरा दीदार रहता था ।
उन्ही की बेबफाई से, हुई हैं ऑख मेरी नम ।।

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