muktak by rahul shivay

तुम प्रेम का पुछते रहते हो
कभी दर्द का भी पुछा तो करो  |
तुम छोड के कारन ज़ख़्मो का, है मरहम क्या पुछ तो करो |
जब दर्द उबलने लगता है मैं मौन सदा हो जाता हूं,
ये खामोशी के शब्दों हैं क्यों, अपने दिल से पुछा तो करो |

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