#Muktak by Ramesh Raj

‘ मधु-सा ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-1 ]

चतुष्पदी——–22.
मजबूरी में कंगन गिरवीं रखने आयी मधुबाला
देख उसे मस्ती में झूमा अपनी कोठी में लाला ।
हँसकर बोला मधुबाला से ‘दूर करूँ सारे दुर्दिन
एक बार बस मुझे सौंप दे अपने तन की मधुशाला’।।
रमेशराज

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