#Muktak by Ramesh Raj

‘ मधु-सा  ला ‘ चतुष्पदी शतक [ भाग-3 ]

चतुष्पदी——–55.

कभी निभाया उस दल का सँग जिधर मिली पद की हाला

कभी जिताया उस नेता को जिसने सौंपी मधुबाला।

राजनीति की रीति बढ़ायी नोटों-भरी अटैची से

पाँच साल में दस-दस बदलीं दलबदलू ने मधुशाला।।

+रमेशराज

चतुष्पदी——–56.

जातिवाद की-सम्प्रदाय की और धर्म की पी हाला

अधमासुरजी घूम रहे हैं लिये प्रगतिवादी प्याला।

पउए-अदधे-बोतल जैसे कुछ वादों की धूम मची

पाँच साल के बाद खुली है नेताजी की मधुशाला।।

रमेशराज

चतुष्पदी——–57.

पर्दे पर अधखुले वक्ष का झलक रहा सुन्दर प्याला

टीवी पर हर एक सीरियल देता प्रेम-भरी हाला।

ब्लू फिल्मों की अब सीडी का हर कोई है दीवाना

साइबरों में महँक रही है कामकला की मधुशाला।।

-रमेशराज

चतुष्पदी——–58.

क्वाँरे मनवाली इच्छाएँ लिये खड़ी हैं वरमाला

कौन वरेगा उन खुशियों को जिन्हें दुःखों ने नथ डाला।

हाला-प्याला का मतलब है जल जाये घर में चूल्हा

रोजी-रोटी तक सीमित बस, निर्धन की तो मधुशाला।।

-रमेशराज

चतुष्पदी——–59.

खुशियों के सम्मुख आया है रंग आज केवल काला

तर्क-शक्ति को चाट गयी है भारी उलझन की हाला।

भाव-भाव को ब्लडप्रैशर है, रोगी बनीं कल्पनाएँ

मन के भीतर महँक रही है अब द्वंद्वों की मधुशाला।।

+रमेशराज

चतुष्पदी——–60.

हर घर के आगे कूड़े का ढेर लगा घिन-घिन वाला

मच्छर काटें रात-रात-भर, बदबू फैंक रहा नाला।

टूटी सड़कों के मंजर हैं, दृष्टि जिधर भी हम डालें

कैसे आये रास किसी को नगर-निगम की मधुशाला।।

-रमेशराज

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