#Muktak by sapna manglik

भाग्य का मिल जाएगा ,तुमको देर सवेर

हडबडी फिर काहे की ,चढ़ते क्यों मुंडेर

१४

दुनिया भर में चल रहा ,यह गोरख व्यापार

असली कोने में पड़ा ,नकली का बाजार

१५

नेता फिर दिखला रहे ,जनता को अंगूर

समझे भैया चाल को ,करें नहीं मंजूर

१६

गोबिंद और ज्ञान की , कद्र न हो जिस ठौर

भूत पिशाच बसें वहां ,बसे न कोई और

१७

लक्ष्य रखे जो आदमी ,आप कर्म से ऊंच

गिर पड़े वो धडाम से, शर्म से जाय डूब

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