#Muktak by sapna manglik

सदकर्मों का तोड़ घट ,जो जन पाप कमाय

लाभ उसको मिले नहीं ,गाँठ का भी लुटाय

पति-पत्नी जो चलत रही ,चलन दो नौक – झोंक

जो जन बोले बीच में ,देत आग में छोंक

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