#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

चाँद बादलों में छुपे छुपे चकोर हो गया ,

बात मुँह में रखी फिर भी शोर हो गया ,

कुछ देर हम उनके ख्यालों में खो क्या गये,

हमें पता ही नहीं चला कि कब भोर हो गया ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल”

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