#Muktak by Dharmender Arora Musafir

इबादत से होती सदा रोशनी है!

 

सुहानी बने फिर गमे ज़िंदगी है!

 

हंसी फूल जैसा खिला जो जहां में,

 

बशर वो यकीनन करे बंदगी है!

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नारी का सम्मान करो

भूल नहीअपमान करो !

मन से इसको तुम पूजो,

मुख से मत गुणगान करो !

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चले बदलाव की आँधी खुशी सब ओर छाएगी !

 

धरा ये एक है सारी यही आवाज़ आएगी !

 

मिटें सब दूरियां दिल की सुहानी ये तमन्ना है ,

 

हमारी शान में दुनिया हसीं फिर गान गाएगी !

 

धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”

(9034376051)

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