#Muktak by Dheedrendra Panchal

रुके नहीं क़दम तेरे , विपत्तियों का राज है ,
तु ख़ून से तिलक लगा ये शत्रु की आवाज़ है ।
तु तिलमिलाए दुश्मनों की कोशिशें नाकाम कर ,
ना कर हे पार्थ शाम अब तु युद्ध त्राहिमां कर ।
शौर्य ना ढले तेरा , तु सूर्य के समान है ,
तु सिंह की है गर्जना तु बाज़ की उड़ान है ।

✍🏻✍🏻धीरेन्द्र पांचाल…..

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