#Muktak by Dheeraj Kumar Pachwaria

डूबती किश्ती को  पार  कौन  करता है

कहते सब हैं जां निसार कौन करता है

लोग मरते हैं मेकअप से ढंके चेहरों पे,

इस जमाने में कहो प्यार कौन करता है

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(प्यार पर महंगाई का असर)

क्या देखें तुम्हें ख़्वाबों में तेरे ख़्वाब महंगे हैं
दिए चिट्ठी में जो तूने सभी जवाब महंगे हैं
तुम्हें प्रपोज़ करने का हमारा है बहुत मन पर,
महंगाई के महंगे दौर में हर गुलाब महंगे हैं

(आज का प्यार)

मोहब्ब्त के दीवाने हैं ये हर पल मौज करते हैं
पुरानी छोड़ कर हर दिन नई की खोज करते हैं
भले घर में नहीं आटा नहीं शक्कर नमक है पर,
अंगूठी ले उधारी पर मग़र प्रपोज़ करते हैं

(प्रेम पर राजनीति)

नदी का जल ढलानों पर कभी ठहरा नहीं होता
माना प्यार है इक राज़ पर गहरा नहीं होता
भले ही बांध दे जग प्रेम को नफ़रत की बेड़ी में,
मोहब्बत पर सियासत का कभी पहरा नहीं होता

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