#Muktak by Dheeraj Kumar Pachwaria

सबके लब पर मोहब्ब्त का पैग़ाम हो

कोई गलियां न सड़कें ये बदनाम  हो

है ये  संदेश  होली  पे  दिल  का  मेरे,

नारियां सब हो  सीता,पुरुष  राम  हों

 

✍कवि धीरज कुमार पचवार्या

 

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