#Muktak by Dheeraj Kumar Pachwaria

अंधकार का अभिनंदन है जुगनू के दरबारों  में

खूं अवाम का चीख उठा संसद के गलियारों में

घायल खेतों के किस्से दफ़न पड़े हैं  मेड़ों  पर,

पप्पू की आंखों के चर्चे छपे आज अख़बारों में

कवि धीरज कुमार पचवारिया

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