#Muktak by Dheeraj Kumar Pachwaria

केशरिया हरा और श्वेत रंगों में सिमट जाऊं
बसंती रंग बन कर शौर्य के अंबर में छंट जाऊं
न ख़्वाहिश चांद तारों की,मेरी बस आरज़ू है ये,
फ़ना हो कर वतन पर मैं तिरंगे में लिपट जाऊं

कवि धीरज कुमार पचवारिया

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