#Muktak by Dheeraj Kumar Pachwaria

अपनी आंख  के  आंसू  छुपाने  के लिए लिखते

ग़मों को गीत के ज़रिए  भुलाने  के लिए लिखते

हमारे प्यार की भाषा इशारों में  जो  ना  समझा,

उन्हीं को ख़्वाब में अपने बुलाने के लिए लिखते

 

कवि धीरज कुमार पचवार्या

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