#Muktak by Dhirendra Panchal

जब जब बदरी करे इशारा , बढ़ जाती मेरी उम्मीदें ।
खन खन करती पायल उसकी चुरा ले जाये मेरी नींदे,
तड़पे धरती तपिश में होकर अपनी प्यास बुझाने को,
केश खोल जब आइ पड़ोसन,मचल गई बारिश की बूँदे।

धीरेन्द्र पांचाल…..

2 thoughts on “#Muktak by Dhirendra Panchal

  • July 31, 2018 at 4:09 am
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    बहुत खूब भाई

  • July 31, 2018 at 4:15 am
    Permalink

    वाह भईया बहुत बेहतरीन

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