#Muktak By Dinesh Pratap Singh Chauhan

“अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर”(दोहे )
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शोभा सारे घरों की,.. सारे घर की छाँव।
नारी घर रोशन करे,जान लगा कर दाँव।।
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दीपक में वो रोशनी,.. … . .नारी बाती तेल।
दीप्त ज्योति रखने सदा ,जाये जां पर खेल।।
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बेटा केवल दे सका ,. अपने कुल को मान।
लेकिन बेटी ने दिया ,दो कुल को सम्मान।।
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दो दो कुल उज्ज्वल करे ,देती सब को नेह।
बेटी ऎसे मानिये ,.. .. कुदरत धर ले देह।।
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“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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