#Muktak by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“महाकवि नीरज को श्रद्धाँजलि”

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गीतों से,.उसने अदब की चादर को बुना था,

शबाब घोल फूलों में,……. वो रिंद बना था,

हमको ग़ुरूर अपने पे,…  हम कह सकेंगे ये,

हम खुशनसीब हैं,हमने”नीरज”को सुना था। – “दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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