#Muktak by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“प्रकाश, प्रभा, कान्ति, उजाला द्युति पर दोहे”

=============================

जग में ज्ञान प्रकाश है,.. इतना ले तू जान।

बिना ज्ञान अँधियार है,ये जीवन का ज्ञान।।

——————————

कितनी लम्बी रात हो ,घना होय अँधियार।

सारे अँधियारे हरा ,…….सूर्य उगेगा यार।।

—————————–

अंधकार की साज़िशें,….. बाधित करें उजास।
बनकर जुगनू कीजिये,तब तक आप प्रकाश ।।
—————————–
लाइट हाउस बन जलें,. यदि जीवन में आप।
तभी सफल ये जन्म है,वरना तो अभिशाप।।
========================
“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

Leave a Reply

Your email address will not be published.