#Muktak by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“दोहे–(परिवार)”
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परिवारी मिल कर रहें ,यदि जीवन में संग।
केवल आ सकता तभी ,इस जीवन में रंग।।
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प्रेम भाव राखें सभी,.. करें उचित व्यवहार।
धरती पर ही स्वर्ग हो,अग़र साथ परिवार।।
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स्वारथ ने जकड़ा हमें,हुये नज़रिये तंग।
इस स्वारथ के कारने,परिवारी ना संग।।
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टूट चुके सब भरोसे ,… परिवारों के साथ।
ख़ुद अपने से सकुच के,मिलता दूजा हाथ।।
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“दिनेश प्रताप सिंह चौहान”

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