#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

व्यर्थ है आंसू बहाना अब यहां फरियाद के,

जुल्मियों से मिल गए हैं रहनुमा जेहाद के,

इस अदालत से कभी भी छूट तू सकता नहीं—

मौत ही चारा है अंतिम कैद में सैयाद के।

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जो भी खाते हैं सल्फास की गोलियां,

कैसे खाते हैं सल्फास की गोलियां,

कम कहीं से तो मजबूर होते नहीं—

जो भी खाते हैं सल्फास की गोलियां।

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