#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

 

दौड़कर पास आना पड़ेगा तुम्हें, फिर गले से लगाना पड़ेगा तुम्हें,

आपकी ही तरह से गया रूठ तो मेरी जिद है मनाना पड़ेगा तुम्हें।

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मेरी आंखों में फिर क्यों बसे रह गये,

मेरी बातों में फिर क्यों फंसे रह गये

एक दिन का ही जब प्यार मुझसे रहा –

मुझको बाहों में फिर क्यों कसे रह गये।

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सबके बच्चों को झँगुली कछोटी मिले,

पेट के वास्ते दूध रोटी मिले ,

आज के युग में सबको मिले नौकरी —

मेरे प्रभु चाहे छोटी-से-छोटी मिले।

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यथा मोटे खसी को लकड़ियों में रस मिला करता,

तथा चीटों को फेंकी खोईयों में रस मिला करता,

कन्या राशि के कुत्तों को भातीं नारियां इतनी—-

उन्हें कमसिन उमर क्या बुड्ढियों में रस मिला करता।

डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

 

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