# Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

मौत को भी जिंदगी से जोड़ना पड़ता मुझे ,

आपना ही प्रण हमेशा तोड़ना पड़ता मुझे ,

रूँध लेता है जमाना जब कँटीले तार से—

अपने अंदर एक रस्ता छोड़ना पड़ता मुझे !

**

सच कह रहा हूं तुमने जब से  भुला दिया,
यादों में अपनी तुमने मुझको रुला दिया,
बरसात आंसुओं की थम्हती नहीं कभी—
बादल हमारी आंख में तुमने बुला दिया।

42 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.