#Muktak by Dr Krishan Kumar Tiwari Neerav

दिन बीत गया धूप में छाया नहीं मिली ,

जीवात्मा को मन की काया नहीं मिली ,

बीजक के साथ शंख निकल आई भूमि से—-

फिर भी जमीन से मुझे माया नहीं मिली !

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दुख ही मिला सदैव मुझे सुख नहीं मिला,

आराम कभी वक़्त के सम्मुख नहीं मिला,

भटकाएगी कहां तक ले जाएगी कहां—-

इस जिंदगी का मुझको कभी रुख नहीं मिला।

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नजरों में दूर-दूर नजारे नहीं उगे,

तुमसे बिछुड़के नभ में सितारे नहीं उगे,

खुशियों के बीज जैसे बंजर में दब गये —–

जाने के बाद से जो तुम्हारे नहीं उगे !

——डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

 

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