#Muktak by Dr Krishan Kumar Tiwari Neerav

मुक्तक

पुस्तकें नहीं मिलतीं कापियां नहीं मिलतीं,

जिन गरीब बच्चों को स्याहियाँ नहीं मिलतीं,

कल को वह कुली जैसी नौकरी भले कर लें–

उन गरीब बच्चों को कुर्सियां नहीं मिलतीं।

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