#Muktak by Dr Krishan Kumar Tiwari neerav

मुक्तक
जिम्मेदारी लापरवाही एक नहीं करने देती ,
रात-दिवस की बेला का व्यतिरेक नहीं करने देती,
अपने ऊपर पड़ी है जबसे अब मैं इतना एक्टिव हूं–
फीवर में भी बिस्तर का अभिषेक नहीं करने देती ।

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जितनी भी नीचता है शब्दों में ढाल दो ,
उल्फत को कहीं दूर कबाड़े में डाल दो,
इस युग में अगर मौंज से जीना है तुम्हें तो–
अपना है कोई आज ये दिल से निकाल दो!
—- डॉ. कृष्ण कुमार तिवारी नीरव

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