#Muktak by Dr Prakhar Dixit

कश्मकश जिंदगी

हम कहाँ से चले थे जाना कहाँ है।
कश्मकश जिंदगी ठिकाना कहाँ है।।
ये मुलाक़ातें थोड़ी जी फसाना भी थोडा,
प्रखर आ के साहिल पर जाना कहाँ है।।
* * * * * * * * * * *-
जरा अश्क रोको न बह जाए काजल।
संभालो ये मोती न तो करें यार बेकल।।
प्रखर बरसे जहाँ भी तुम बहुत याद आए,
शरद रात मादस तुम न करो दिल घायल।।
प्रखर दोक्षित
फर्रुखाबाद

Leave a Reply

Your email address will not be published.