#Muktak by Dr Prakhar Dixit

मुक्तक

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नेह का दीप जलाए रखना।

अपना हमें बनाए रखना।।

छूट न जाए  डोर वक्त की,

नैनन सपन सजाए रखना।।

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न जाने कब जीवन संध्या मीत यकायक ढल जाएगी।।

ये यौवन कब रहा किसी का जरा एक दिन छल जाएगी।।

दम्भ जवानी मिथ्याचरण वो ऊँचे गुम्बद गुमाँ भरे,

जब जग से जाना हाथ पसारे  तो क्यों कर नियत मचल जाएगी।।

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कोमल मन की सुभग भाव्या निर्झरिणी सी बहती पलपल।।

कोई कोण न बचा दृष्टि से नाप लिया सारा दलदल।।

शब्दांकन की भाव भंगिमा मोहमयी सरिते पावन,

जीवन मख की पावन समिधा करती प्रखर बुद्धि विमल।।

 

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