#Muktak by Dr Prakhar Dixit

आध्यात्मिक दोहे

 

परो कूप भव फंद प्रभु ,गहौं कौन की बाँह।

करो सबल अंगुरी पकरि व्यापक सबरी थाँह।।

 

तुमहिं सहारो जीवनीय, तुमहिं जगत आधार।

दरश करों पुतरी मिचैं , हे श्रीकृष्ण लिलहार।।

 

जँह राधा तह कृष्न जू, किशन राधिका एक।

प्रेमपगी अद्वैत छवि देवहु सुमति विवेक।।

 

नाक बास श्रीहरि  रमा, नारायण श्रीपाद।

प्रलय पालना सृजन में जीवन को अनुवाद।।

 

* शब्दार्थ=

,    मिचैं= बंद होना

 

प्रखर दीक्षित

फर्रुखाबाद

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