#Muktak by Dr Prakhar Dixit

(1)

 

अंशावतार नारायण के जमदग्नि तनय ऋषि परशुराम।

भुजदण्ड प्रबल थामें कुठार उपवीत (यज्ञोपवीत)कांध हिय रामनाम।।

आवेश प्रखर भट नत नमस्तक हे  विप्र ऋषीवर हो प्रधान,

हे तपोनिष्ठ हे वीतराग कर ज़ोर दन्डवत प्रज्ञधाम।।

 

(2)

 

तुमसे हम हैं परिचय अपना तप साधक जय।

आज्ञाकारी हे ब्रह्मपुरख तेजोमय शिव आराधक जय।।

यज्ञोपवीत कर परसु धरे वैराग्य निधि जय ज्ञान प्रवर,

क्रोधाग्नि प्रखर पै नवनीत ह्रदय हे बोधमयं संहारक जय।।

 

प्रखर दीक्षित

फर्रुखाबाद(उ.प्र.)

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