#Muktak by Govind Charan

कितने समाधि पे चढ़ गए, कितने और जाने को है।

वही भीड़,वही नारे, इकट्ठा हो जुमला गाने को है

कि हम शौक व्यक्त करते है शहिदो के बलिदान पर

प्रधान जाग नींद से, फिर यही पैगाम सुनाने को है

कुं गोविन्द चारण

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