#Muktak by Harprasad Pushpak

क्रोध कभी अच्छा नही हर लेता है चेन ।

काम बिगाड़ेगा तेरा विचलित हो दिन रैन ।।

 

भाषा ऐसी बोलिय जोे मुख से बरसे फूल ।ः

भाव विहृल सब को करे हो सबके अनुकूल ।।

 

अहंकार अच्छा नही मैं घमंड का दास ।

अंधकार से कर रहा क्यों प्रकाश की आस? ।।

 

व्यर्थ अर्थ की खोज में जीवन दिया गंवाये ।

राम नाम जाना नही किस विधि मुक्ति पाये ।।

 

अनुगामी उनके बनों  जिन का सद् व्यवहार ।

जन समाज सुधरे तभी जब सब का सत्कार ।।

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