#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -हास्य व्यंग

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1

गधे जलेबी खा रहे ,घोड़े खायें घास ।

अनपढ़ नेता जी करे ,टी वी पर बकवास ।।

2

काने को काना कहो ,तुरत लड़ाई होय ।

प्रेम प्यार से पूंछ लो , कहाँ आँख दी खोय ।।

3

रडुआ रोया रात को ,कर गोरी को याद ।

नारी बिन सब सुन है ,जीवन है बर्वाद ।।

4

नाई की बारात में ,चिलम भरे ना कोय ।

ठाकुर ठाकुर सब दिखे ,गुड़ गुड़ कैसे होय ।।

5

दिल्ली सड़कों पर दिखे ,धुंआ धुंध अपार ।

साँस न आये शहर में ,गाँव लौट जा यार ।।

 

हलधर -9897346173

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