#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -चिंतन

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1

पुरुरवा भुज पास में ,स्वप्न परी रस मत्त ।

दिनकर “बाबा लिख गये ,कथा उर्वशी सत्त ।।

2

मैं तो बस इक बूंद हूँ ,सागर है साहित्य ।

हलधर”मन की बात का ,जाँचो परखो सत्य ।।

3

शब्द ब्रह्म सौगात हैं ,करे कवि आह्वान ।

शक्ति रूप धारण करे ,लगे फूल ज्यों बान ।।

4

सूरज उगता रोज है ,घाटी में अंधेर ।

स्वेत कपोत के रूप में,कागा खड़े मुँडेर ।।

5

हलधर “दिनकर ” खोज में ,गये मंच की ओर ।

कविता चुप बैठी मिली ,मिला चुटकुला शोर ।।

हलधर -9897346173

 

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