#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे – देश राग

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1

नारों में ही फस गये ,रोटी के अनुबंध ।

निर्वाचन के बाद में , मुरझाई सौगंध ।।

2

भ्रष्ठ निरोधक यान नें ,बैठा भ्रष्टाचार ।

बाज मरा ना ऐक् भी ,चिड़ियां हैं बीमार ।।

3

धूल चदरिया में छिपा ,मेरा दिल्ली गाँव ।

मौसम सकुनी हो गया ,हारे पांडव दाँव ।।

4

केशर वाले खेत में ,उगा हुआ बारूद ।

अपनी ही जड़ खोदता ,घाटी में फरमूद ।।

5

बारूदी बादल फटे ,बरस रही है आग ।

केशर घाटी में छिपे ,पाकिस्तानी नाग ।।

हलधर -9897346173

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