#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -मंथन

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1

साधन बनता सिद्धि में ,हठी मनुज का योग।

साध्य मानकर जो चले ,यह बन जाता रोग ।।

2

अब तो कवि भी भौकते ,देखा मैंने रात ।

कविता की गरिमा घटी ,सीधी सच्ची बात ।।

3

मीठी भाषा से बढे ,हर कवि का सम्मान ।

तीखी भाषा से घटे, साहित्यक उपमान ।।

4

टी,वी, चेनल से नहीं ,कविता की पहचान ।

भौं भौं जैसे नाम से ,साहित्यक अपमान ।।

5

कहते कवि कुछ और हैं ,करते कवि कुछ और ।

कुछ ढेंचू की ओर है,कुछ भौं भौं की ओर ।।

हलधर -9897346173

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