#Muktak By Jasveer Singh Haldhar

दोहे

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1

बाग बगीचे कट गये , बने फ्लैट मीनार ।

पंक्षी रो रो कह रहे ,लूट लिया घर बार ।।

2

प्रकृति ने  आदि काल से, सहे मनुज के वार ।

रौद्र  रूप  जब  धारती ,  होवे  हां  हां  कार ।।

3

खेती वाली धरा पै  , मिलें  मचाती  शोर ।

जलवायू विष घुल गया ,बीमारी का जोर ।।

4

जंगल सारे कट गये ,कंकरीट चहुओर ।

कोयल अब कूके कहा ,कैसे नाचे मोर ।।

5

गरम हवा को डांटती ,पानी प्यासी दूब ।

तेरे मारे ना  मरुँ , जड़  गहरी  हैं  खूब ।।

हलधर -9897346173

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