#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -हलधर

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1

राज विभीषण को दिया ,ऐसे मेरे राम ।

लोगो ने छीना यहाँ ,उनका अपना धाम ।।

2

माँ की आँखों में दिखा ,होली का त्योहार ।

भीगी पलकें कह रही ,बेटा सरहद पार ।।

3

जैसा आया गाँव से ,वैसा ही हूँ आज ।

मोड़ न पाये चाल को ,शहरी रीत रिवाज ।।

4

मैं कविता की बूंद हूँ ,मेरी क्या औकात ।

मात शारदे से मिली ,छंदों की सौगात ।।

5

हलधर “कविता खोज में ,जा बैठे किस ठौर ।

दिखे चुटकुले बाज ही ,मंचों के सिरमौर ।।

हलधर -9897346173

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