#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

हलधर के दोहे

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1

कविता होनी चाहिए,करुणा ओज प्रधान !

अँधियारे को चीर दे ,फूँके शव में प्राण !!

2

शब्द भाव रस में तली , कहे लोक हित बात !

मानवता कल्याण की , कविता है सौगात !!

3

दिनकर के बिन दिवस की , ना कोई पहचान !

बिन  भाषा साहित्य के ,हो ना देश महान !!

4

माँ में बसती  है सदा , ममता  की तस्वीर !

चोट लगे ज्यों लाल को ,माँ को होती पीर !!

5

माँ की महिमा है बड़ी ,धरती का आधार !

निराकार जगपाल का ,माँ ही तो साकार !!

हलधर -9897346173

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