#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

हलधर दोहे
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1
कवियों ने गाया नही ,सही समय पर द्वंद ।
राजा रानी शान में ,पढ़े क़सीदे छंद ।।
2
सफल नही कहला सके ,कुछ गुमनाम महान ।
मिलामौत के बाद में ,कवियों को सम्मान ।।
3
जो समझें साहित्य को ,धन अर्जन औजार ।
चार दिनों की चांदनी ,मंचों का बाजार ।।
4
विजय किसी भी क्षेत्र में ,दिलवाती पहचान ।
अहंकार से मुक्त ही ,होते गुनी सुजान ।।
5
शक्ति निहित है शस्त्र में ,शास्त्र रहा आधार ।
क्षमा अहिंसा शीलता ,योद्धा का शृंगार ।।
6
युवा हृदय की हूक से ,जले क्रांति की आग ।
देश तभी आगे बढ़े, युवा खड़े हों जाग ।।
7
भूतकाल की नाव में ,सफर करे इंसान ।
वर्तमान पतवार है , जीवन नदी समान ।।
8
लहू नदी में तैरता ,मानव का इतिहास ।
सत्य अहिंसा ने सदा ,किया देश का नाश ।।
9
शक्ति प्रदर्शन के बिना ,होता ना अहसास ।
राम धनुष ताने बिना ,सिंधु न आया पास ।।
10
पीली साड़ी ना फबे ,श्यामल काया नार ।
ज्यों सरसों के खेत में ,दिखती भैंस छिनार ।।
हलधर -9897346173

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