#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे

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1

संविधान के वक्ष पर ,किये सैंकड़ों घाव ।

अब खतरे में कह रहे,देख डूबती नाव ।।

2

शेखर बिस्मिल भगत को ,माने नहीं शहीद ।

पिछले सत्तर साल में ,खुली न जिनकी नींद ।।

3

जात धर्म मालूम नहीं ,बीते दो सौ साल ।

गांधी जी के नाम से ,खूब बटोरा माल ।।

4

सत्ता जाती देख कर ,होता बहुत मलाल ।

बातें करें चरित्र की , भृष्टाचारी  लाल ।।

5

मर्यादा के हनन का,  ठेका जिनके पास ।

खम्बा बिल्ली नोचती ,हार न आये रास ।।

हलधर -9897346173

 

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