#Muktak by Kavi Nadeem Khan

दिल पत्थर के हुए तो क्या एक दिन शीशे में बदल ही जाएंगे
पत्थरदिल लोग एक दिन बर्फ की तरह पिघल ही जाएंगे
मुझमे इतनी हिमाकत कहाँ “नदीम” बस यादें लिए फिरता हूँ
ठोकरों की मार खा-खाकर हम भी एक दिन आगे निकल ही जाएंगे

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