#Muktak by Kavi Nilesh

अपने पर हास्य देख लो अब

 

कवियों कि मीटिंग कल ही हुई यहां थी

सारी कि सारी बातें बताई गई थी

कवियों ने कहा चलो पाकिस्तान घूमूंगा

पागलों कि संख्या अब वहां  बढाउंगा

 

चाय

सुबह-सुबह मिलती है गोरी
आंखें खोल देती है ।
चौके-चौराहा गली-नुक्कड़ पर सांसें बोल देती है
जितनी गरम उतनी इठलाती जिह्वा को स्वाद बताती है ।
सुंदर प्यालों में आकर तू अपनी कहानी सुनाती है
कवि निलेश

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