#Muktak by Kavi Sharad Ajmera Vakil

 

वकील की बतियां…….

 

आसमान में रहने वाले जमीं पर रिश्ते तलाश रहे हैं.

धन,सत्ता,बल में मगरूरअपनों को ही दुत्कार रहे हैं..

 

परिंदे हो या इंसान ठिकाना मिलेगा सिर्फ जमीं पर.

रावण कंस नहीं यहाँ तो राम कृष्ण ही प्यार पा रहे हैं..

 

………….””वकील””

**ग़ज़ल के दो शेर पेश हैं**

 

मेरे दिल की बस एक ख्वाहिश है.

ता उम्र साथ रहे यही फरमाइश है..

 

खुली आँखों में तो तेरा साथ रहे.

बंद आँखों में भी तेरी ही नुमाईश है..

 

*वीर वंदना*

 

अखंड ज्ञान का अमृत कलश दे इस धरा को चमन किया.

अधर्म रूपी धुआँ छाया था जो धरा पर मर्दन किया..

जिन धर्म में दिव्यता उडे़ल कर तुमने जग को दिया.

कार्तिक कृष्ण अमावस्या को शिवपुरी को गमन किया..

 

“वकील”

 

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