#Muktak by Lal Bihari Lal

माँ पर कुछ दोहा

माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार।

माँ बिन जीवनलालका,समझो है बेकार।1।

माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल।

माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2।

माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार।

गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3।

माँ के दूध का कर्जा, चुका न पाया कोय।

जन जो कर्ज चुका दिया,जग बैरी ना होय।4।

माँ पीपल की छांव है,माँ बगिया के मूल।

माँ जीवन का सार है, हरे लाल के शूल।5।

माँ से जग संसार है,माँ से जीवन मूल।

माँ बिना मोल कुछ नहीं,मुर्झाये सब फूल।6।

* सचिव-लालकला मंचनई दिल्ली

फोन-9868163073 या7042663073

 

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