#Muktak by M.A.Vasant

नहीं मंदिर मैं जाता हूँ, नहीं मस्जिद मैं जाता हूँ।

जहाँ सब लोग जाते हैं, नहीं हरगिज मैं जाता हूँ।

मुझे मालूम है धरती पे है जन्नत कहाँ भाई

मैं अपनी मां के कदमों में सदा सर को झुकाता हूँ।

-एम.ए.वसंत

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