#Muktak By Madan Mohan Sharma Sajal

नारी पर दोहे :-
★★★★★
01) घर सूना नारी बिना, सूना जग संसार।
खुशबू बिन बेकार है, उपवन मलय बहार।।

02) संकट में सहभागिनी, सुख में है गलहार।
त्याग तपस्विनी मानिनी, तन मन देती वार।।

03) ज्यों चकमक में आग है, बादल में बरसात।
तन परछाई ज्यों चले, नारी आतमसात।।

04) सबला है हर रूप में, मत अबला तू जान।
जीवनदायिनी है सदा, वेद करे गुणगान।।

05) ममता मीठी बेल है, प्रेम- प्यार की डोर।
खुशियां नाचे आँगना, कोई ओर न छोर।।

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मदन मोहन शर्मा ‘सजल’

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