#Muktak by Mahendra Mishra

सांझ की लालिमा से जब ये सारा जग सुशोभित है,
उतारे आरती मंदिर में देवों की पुरोहित है,
तेरी उड़ती हुई जुल्फों और मुस्कान पे प्यारी,
तुम्हारे सामने गाता ये ‘मोहित’ तुमपे मोहित है।

तुम्हारे साथ जुड़ करके तुम्हारा नाम बन जाऊँ,
जो सुंदर स्वर्ग से भी हो वो पावन धाम बन जाऊँ,
मेरे गीतों की वंशी में बनो प्रिय राधिका अब तुम,
मैं तुममें इस कदर डूबूँ तुम्हारा श्याम बन जाऊँ।
रचनाकार- महेंद्र मिश्र ‘मोहित’

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