#Muktak by Mahendra Mishra

भले दो लाख आँसू तुम सदा हंस के पियूँगा मैं,
करोगी बेवफाई तुम प्यार फिर भी करूँगा मैं,
सदा है जो कहा तुमसे वही फिर आज कहता हूँ,
तुम्हारा था, तुम्हारा हूँ, तुम्हारा ही रहूँगा मैं।

मिले जो घाव ठोकर पे वो सीना चाहता हूँ मैं,
तेरे नयनों के हर आँसू को पीना चाहता हूँ मैं,
तुम्हारे दिल की नगरी पे प्रिये अधिकार करके अब,
तुम्हारा रहनुमा होकर के जीना चाहता हूँ मैं।

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