#Muktak by Mam Chand Agrwal Vasant

दोहे
विषय-प्रेम
-मामचंद अग्रवाल वसंत
जमशेदपुर,09334805484

ढाई आखर प्रेम के,बतला गए कबीर।
प्रेम भूल अब के युवा,चीर रहे चीर।।

प्रेम जगत की नींव है,प्रेम जगत का सार।
गंध बिना ज्यों पुष्प है,प्रेम बिना संसार।।

बजी प्रेम की बाँसुरी,यमुना जी के तीर।
दौड़ी आई राधिका, हो कर प्रेम अधीर।।

आदि काल से प्रेम ने,किया दिलों पर राज।
शैलसुता ने चुन लिया,शिव जी को सरताज।।

पुष्प वाटिका में मिले,राम सिया के नैन।
प्रेम हृदय में संचरा,छिना दिलों का चैन।।

मीरा ने अमृत समझ,किया हलाहल पान।
विष को अमृत कर दिए,प्रेम विवश भगवान।।

लगे प्रेम का रोग जब,कहाँ दिवस औ रात।
फिल्मी ऋषि बतला गए, बड़े पते की बात।।
-वसंत

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