#Muktak by Mam chandh Agrwal Vasat

वसंत के दोहे
नहीं दंभ करते कभी,जो हैं उत्तम लोग।
अंत सुनिश्चित जानिए,लगा जिसे यह रोग।।

बीती बातों में नहीं, कभी उलझते संत।
पतझड़ के पश्चात ही,आता सुखद वसंत।।

आना-जाना जगत में,एक सनातन रीत।
जब तक साँसें साथ दें,घटे न अपनी प्रीत।।

प्रीत,मीत से यों करें,ज्यों पानी से मीन।
हो जाती पानी बिना,मछली निर्बल,दीन।।

उससे प्रीत न कीजिए, जिसके मन छल-छंद।
निश्छल मन की प्रीत ही,देती परमानंद।।
-वसंत जमशेदपुरी,9334805484

Leave a Reply

Your email address will not be published.